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“खुशियाँ” दीवाली मेला – एक यादगार आयोजन

“घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूँ कर लें । किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए ।।”

निदा फ़ाज़ली साहब का ये शेर तब मूर्तिमान होता सा लगा जब ‘खुशियाँ’ द्वारा आयोजित दीवाली मेले में सभी को इतने उत्साह और उमंग से बच्चों के लिए कार्य करते देखा। कुछ लोग पुराने थे और कुछ मुझ जैसे नए थे पर फर्क कर पाना मुश्किल था कि कौन कब जुड़ा क्योंकि सब इतनी तन्मयता से मिलकर काम कर रहे थे। हालाँकि, सबको अलग-अलग काम दिए गए थे पर सारे लोग सभी कामों में हाथ बँटा रहे थे, चाहे स्टालों को सजाना हो, साफ-सफाई हो या फिर व्यवस्था की बात हो। लग ही नहीं रहा था कि हम भिन्न-भिन्न प्रदेशों, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेशों से आए हुए लोग हैं। सब का एक ही उद्देश्य था, बच्चों के लिए बेहतर से बेहतर करना।

Khushiyan Diwali Mela for ngo kids

यह मेरा ‘खुशियाँ’ के साथ पहला अनुभव था और मुझे कितना अच्छा लगा, ये शब्दों में बता पाना संभव नहीं है। ठीक भी है, क्योंकि हम हमेशा भावों को भाषा में बांध भी कहाँ पाते हैं। जब बच्चों के चेहरे पर हंसी देखी तो मन एक संतुष्टि से भर सा गया। दीवाली से पहले दीवाली की खुशी मुझे इस मेले में आकर मिली। बच्चों साथ-साथ हम सबने भी खूब मस्ती की और एक बार अपने अंदर के बच्चे को फिर से महसूस किया। ईश्वर से प्रार्थना है कि ‘खुशियाँ’ आगे और भी ऐसे कार्यक्रम करता रहे और हम उनमें सहभागी बनें।

Event Experience shared by:- Mr Alok Nigam

Khushiyan Volunteers Team

Alok Nigam

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